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🌳 छत पर बनाया हरा-भरा स्वर्ग: कोटा की रेनुबाला सिंह की ‘जंगल’ कहानी

कोटा की रेनुबाला सिंह ने अपनी छत को राजस्थान की गर्मी और सूखे की चुनौती देकर एक घने जंगल में बदल दिया है। उनकी यह अद्भुत यात्रा सिर्फ़ एक पौधे से शुरू हुई थी, और उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक शानदार गार्डन बनाने के लिए बाज़ार से महंगे प्लांट खरीदने की ज़रूरत नहीं होती है। आइए इस लेख में जानते हैं उनकी अद्भुत बागवानी यात्रा के सीक्रेट्स (secrets)।

🌱 एक ज़ेड प्लांट ने कैसे लिया ‘जंगल’ का रूप

लगभग एक साल पहले, रेनुवाला जी ने अपनी छत पर महज़ एक छोटा सा ज़ेड प्लांट (Jade Plant) लगाया था। उसी एक प्लांट की कटिंग (cutting) से उन्होंने आज अपनी छत पर सैकड़ों की संख्या में ज़ेड प्लांट तैयार कर लिए हैं।  जिससे उनकी छत अब किसी जंगल से कम नहीं लगती। इतना ही नहीं, अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने इन पौधों में से कई खूबसूरत बोनसाई (Bonsai) भी बना डाले हैं। इसमें उनकी मदद उनके पति संतोष कुमार सिंह करते हैं। संतोष कुमार सिंह आर्मी से रिटायर्ड है। एवं उनके शौक को आगे बढ़ाने में काफी मदद कर रहे हैं। उनकी बागवानी का एक अनोखा नियम है कि वह बाज़ार से  पौधा नहीं खरीदती हैं। वह अपने गार्डन में सदाबहार फूलों के बीज (seeds) लगाती हैं और कटिंग से लगने वाले प्लांट, जैसे मनीप्लांट (Money Plant) और ज़ेड, पर ख़ास ध्यान देती हैं।

☀️ कम देखभाल में भी हरा-भरा रहता है गार्डन

रेनुवाला जी बताती हैं कि ज़ेड एक हार्डी प्लांट (Hardy Plant) है, जिसकी वजह से वह राजस्थान की तेज़ गर्मी में भी इतना हरा-भरा रहता है। इसे बहुत ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत नहीं होती और यह कम मेहनत में भी अच्छे से बढ़ता है। इसकी अच्छी ग्रोथ के लिए इसे रोज़ाना 6 से 7 घंटे की धूप मिलनी चाहिए। वह बताती हैं कि इसके लिए भुरभुरी, अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी तैयार की जाती है और इसे केवल दो से तीन दिन में एक बार पानी देने की ज़रूरत होती है। इस आसान देखभाल के कारण उनका गार्डन हमेशा तरोताज़ा बना रहता है। सोशल मीडिया पर रेनुवाला के गार्डन को अच्छी पहचान मिली हुई है। जहां वह लोगों को गार्डनिंग के टिप्स देती नजर आती है। उनके गार्डन की झलक देखने के लिए आप उनके इस्टा पेज के लिए क्लिक करें। यू ट्यब के पेज के लिए क्लिक करें

 मनीप्लांट की बेहतरीन ग्रोथ का घरेलू नुस्खा!

रेनुवाला जी की छत पर कई तरह का मनीप्लांट है जो बहुत अच्छी ग्रोथ करता है और जिसकी पत्तियाँ बड़ी और हरी-भरी होती हैं। जब उनसे मनीप्लांट की बेहतरीन ग्रोथ के टिप्स मांगे गए, तो उन्होंने एक यूनीक (unique) और साधारण नुस्खा (tip) बताया। वह मनीप्लांट में चावल और दाल धोने के बाद बचे हुए पानी का इस्तेमाल करती हैं। यह पानी पौधों को प्राकृतिक पोषण देता है। इसके अलावा, खाद (fertilizer) के तौर पर वह केवल वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) का इस्तेमाल करती हैं। रेनुवाला सिंह की यह कहानी हमें सिखाती है कि बागवानी महँगा शौक नहीं है, बल्कि यह लगन, सही जानकारी और घर के साधारण नुस्खों से भी संभव है।

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