अक्सर आपने सुना होगा कि गार्डनिंग या पेड़-पौधे आपको सुकून देते हैं, लेकिन मिर्ज़ापुर की ओमेश्वरी की कहानी इससे बहुत आगे है। उनका कहना है कि गार्डनिंग ने उन्हें नया जीवनदान दिया है। उनके लिए, गार्डनिंग इस दुनिया की वह दवा है जो हर बीमारी को ठीक करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। ओमेश्वरी काफी लंबे समय से बागवानी कर रही हैं, और इस लेख में, हम उनकी प्रेरणादायक यात्रा जानेंगे कि कैसे इस हरे-भरे शौक ने उन्हें बीमारियों से बाहर निकाला।
जब बिस्तर पर बीत रहा था जीवन
ओमेश्वरी ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद उनके यूट्रस (गर्भाशय) में दिक्कत हो गई थी। महीनों तक अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। यह उनके जीवन का सबसे खराब समय था। इसके बाद उन्होंने इलाहबाद में इलाज कराया। वहाँ डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने प्रकृति के करीब रहने का प्रयास किया। इस बदलाव के बाद धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधार होने लगा। जल्द ही, बिस्तर से उठकर गार्डन में समय बिताना उनकी पहली पसंद बन गया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं, और उनका दृढ़ता से कहना है कि गार्डनिंग ने ही मुझे नया जीवन दिया है।

कबाड़ से जुगाड़: DIY पॉट मेकर
ओमेश्वरी सिर्फ गार्डनिंग ही नहीं करतीं, बल्कि वह अपनी रचनात्मकता से इसे और भी खास बनाती हैं। ओमेश्वरी घर पर ही बोतल से पॉट तैयार करती हैं। उन्हें कबाड़ से जुगाड़ करना बहुत पसंद है, जिससे उनकी बागवानी काफी सस्ती बन जाती है। उनके द्वारा पाइप से तैयार DIY सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल है। वह टायर, बाल्टी आदि से भी कई तरह के सुंदर गमले बना चुकी हैं। उनके गार्डन में करीब 250 से ज़्यादा प्लांट हैं। इनके गार्डन की बहुत सी वीडियो वायरल है। चैनल से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
रिश्तेदारों से भी मांग लेती हैं ‘कबाड़’

गार्डनर ओमेश्वरी अपने शौक को लेकर कितनी जुनूनी हैं, इसका अंदाज़ा उनके इस व्यवहार से लगाया जा सकता है। “घरों में बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जो और लोगों के लिए कबाड़ हों, लेकिन मेरे लिए वह बहुत काम आती हैं।” वह अपने रिश्तेदारों से भी खुशी-खुशी कबाड़ मांग लेती हैं। इस बार, वह अपने मायके से दही की हांडी लेकर आई हैं, जिनमें उन्होंने पौधे लगा दिए हैं। यह उनके लिए हर्ष की बात है कि रिश्तेदार भी उनके लिए ऐसी चीजों को सहेज कर रख लेते हैं, जिनमें वह घर जाकर पौधे लगा सकती हैं।
