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नैना राठौर की कहानी: गम को गुलशन में बदलने का अनोखा सफ़र

क्या आपको लगता है कि आँगन में लगे 4 पौधे सिर्फ हरियाली बढ़ाने का काम करते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि बागवानी (gardening) अकेली एक ऐसी चीज़ है जो बिना दवाइयों के भी शारीरिक और मानसिक कष्टों को दूर करती है और आपको दुनिया के ख़ास इंसानों में शामिल करती है? यह कहना है राजस्थान, चित्तौड़ की बिणणी नैना राठौर का।

वह पिछले 3 से 4 सालों से बागवानी कर रही हैं। उनका मानना है कि ज़िंदगी को स्ट्रेस-फ्री बनाना है तो बागवानी से अच्छा कुछ नहीं हो सकता।उन्होंने कोविड के समय में अपने भाइयों को खो दिया, और इस दुःख में जब उनकी ज़िंदगी खत्म होने लगी, तब बागवानी ने उनके दुःख को कम किया। आज स्थिति यह है कि उनका कहना है कि बागवानी की बदौलत लोग अब उन्हें जानते हैं। बागवानी (gardening) उनकी पहचान बन गई है। वह अपने दिन का सबसे अच्छा वक्त पौधों के बीच में बिताती है.

शौक और जुनून में नहीं होती थकान

नैना का कहना है कि बागवानी उनका पहला काम है। उन्हें इस काम में कभी भी थकान नहीं होती है। वह सलाह देती हैं कि गृहणियों को बागवानी ज़रूर करनी चाहिए, इससे आपको चारों तरफ़ सिर्फ़ प्यार दिखेगा। आज इसी शौक़ की बदौलत अख़बारों में उनके आर्टिकल भी प्रकाशित होते हैं।

लो बजट में करती हैं

उनका कहना है कि बागवानी एक सस्ता सौदा है। वह घर के कबाड़ में ही फूल खिलाती हैं। “मैं घर के डिब्बों, बोतलों में ही पौधा उगाती हूँ। गोबर की खाद का उपयोग करती हूँ।” हर चाहती है कि जैसे हम बच्चों को संस्कार सिखाते है वैसे ही गार्ड्निंग सिखाएँ. नैना जी गार्ड्निंग की और झलक देखेने की लिए आप उन्हें Insta Page Bagiya पर क्लिक कर देख सकते है.


आपकी ज़िंदगी को बागवानी ने कितना बदला, हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएँ!


 

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